पितृ पक्ष 2025 – महत्व, तिथि और श्राद्ध विधि

पितृ पक्ष श्राद्ध विधि
पितृ पक्ष के दौरान पितरों की स्मृति में श्राद्ध कर्म

पितृ पक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष भी कहा जाता है, हर वर्ष भाद्रपद/आश्विन माह में आता है। इस दौरान अपने पूर्वजों को तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध द्वारा स्मरण किया जाता है। माना जाता है कि पितरों को तृप्त करने से वे आशीर्वाद देते हैं और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

पितृ पक्ष 2025 की तिथियाँ

पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 2 सितंबर 2025 से होगी और समाप्ति 17 सितंबर 2025 को होगी।

पितृ पक्ष का महत्व

  • पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व।
  • श्राद्ध और तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • घर में शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है।

श्राद्ध/तर्पण विधि (संक्षेप में)

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. कुशा आसन पर बैठकर संकल्प लें।
  3. जल, तिल और कुशा के साथ तर्पण करें।
  4. पूर्वजों के नाम का उच्चारण करते हुए पिंडदान करें।
  5. ब्राह्मण अथवा जरूरतमंद को भोजन व दान दें।

क्या करें और क्या न करें

  • पितृ पक्ष में सात्विक आहार व्रत का पालन करें।
  • नए कार्य, विवाह, गृहप्रवेश आदि से बचें।
  • दान-पुण्य करने से विशेष लाभ मिलता है।

🙏 अपने पितरों को स्मरण करके श्राद्ध अवश्य करें। अगला लेख पढ़ें: पितृ पक्ष में तर्पण के मंत्र

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