“स्मरगरलखण्डनम्” से प्रारम्भ, संस्कृत श्लोक व हिन्दी भावार्थ
श्लोक 1 — मंगलाचरण
स्मरगरलखण्डनं मम शिरसि मण्डनं
देहि पदपल्लवमुदारम् ।
जय जय देव हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: हे देव! आप कामदेव के विष (मोह) को नष्ट करने वाले हैं। मेरे मस्तक के भूषण रूप में अपने पवित्र चरणपल्लव दीजिए। जय जय देव हरे।
श्लोक 2 — मत्स्यावतार
प्रलयपयोधिजले धृतवानसि वेदं
विहितवहित्रचरित्रमखेदम् ।
केशव धृतमीनशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: प्रलय के जल में आपने वेदों को बचाने के लिये मीन रूप धारण किया और नौका का कार्य किया। केशव! मीन रूप धारण करने वाले जगदीश! हरे! जय।
श्लोक 3 — कूर्मावतार
क्षितिरिति विपुलतरे तिष्ठति तव पृष्ठे
धरणिधरकणककिणि-रुचिरे ।
केशव धृतकूर्मशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने अपने विशाल कूर्म (कच्छप) शरीर पर मंदराचल को रखा और समुद्र-मंथन किया। हे केशव! कूर्म शरीर धारण करने वाले जगदीश! जय।
श्लोक 4 — वराहावतार
वसतिदशनशिखरे धरणी तव लग्ना
शशिनि कलङ्ककलेव निमग्ना ।
केशव धृतवराहशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने अपने वराह दाँतों पर पृथ्वी को उठाया, जैसे चन्द्रमा में कलंक लगा हो। हे केशव! वराह शरीर धारण करने वाले जगदीश! जय।
श्लोक 5 — नरसिंहावतार
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृङ्गं
दलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम् ।
केशव धृतनरसिंहशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपके करकमल में अद्भुत नख-शृंग थे, जिनसे आपने हिरण्यकशिपु के तन-भृंग को विदीर्ण किया। हे केशव! नरसिंह रूप धारण करने वाले जगदीश! जय।
श्लोक 6 — वामनावतार
छलयसि विक्रमणे बलिमद्भुतवामन
पदनखनीरजनितजनपावन ।
केशव धृतवामनशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने अद्भुत वामन रूप धारण कर बलि को तीन पग में बाँध लिया और चरण नखों से लोकों को पवित्र किया। हे केशव! वामन रूप वाले जगदीश! जय।
श्लोक 7 — परशुरामावतार
क्षत्रिय-रुधिरमये जगदपगतपापं
स्नपयसि पयसि शमितभवापम् ।
केशव धृतभृगुपतिरूप जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने भृगुपति (परशुराम) रूप में क्षत्रियों के पाप का नाश किया और जगत को पवित्र किया। हे केशव! जय जगदीश! हरे!
श्लोक 8 — रामावतार
वितरति वशीकृत-वनर-लङ्कापुरीदाहं
दशनिधररुचिरदनुरघुरं ।
केशव धृतरामशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने रामरूप में वानरों के साथ लंका को जीत लिया और रावण का वध किया। हे केशव! राम शरीर धारण करने वाले जगदीश! जय।
श्लोक 9 — बलरामावतार
वहसि वपुशी विषदे वसनं जलदाभं
हलहति भितिभृतजनमणिजलधाभम् ।
केशव धृतहलधररूप जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने श्वेतवसन और हल (फावड़ा) लिये बलराम रूप धारण किया। हे केशव! हलधर रूप धारण करने वाले जगदीश! जय।
श्लोक 10 — बुद्धावतार एवं कल्कि संकेत
निन्दसि यज्ञविधेः अहह श्रुतिजातं
सदयहृदयदर्शितपशुघातं ।
केशव धृतबुद्धशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: आपने बुद्धरूप में करुणा दिखाकर पशुहत्या निन्दित की और अहिंसा का संदेश दिया। हे केशव! बुद्ध शरीर वाले जगदीश! जय।
कल्कि संकेत
कल्किः भवति भवद्भविष्यति युगान्ते
कृपयसि तन्महतां च खलान्ते ।
केशव धृतकल्किशरीर जय जगदीश हरे ॥
हिन्दी अनुवाद: युगान्त में आप कल्कि रूप में अवतरित होकर दुष्टों का नाश करेंगे। हे केशव! कल्कि रूप वाले जगदीश! जय।
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