धनतेरस 2025 – धन, स्वास्थ्य और शुभारंभ का पर्व
धनतेरस दीपावली पर्व का पहला दिन है, जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। यह दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन या नए सामान की खरीद को शुभ आरंभ और समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
धनतेरस का पौराणिक महत्व
मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को “धन्वंतरि जयंती” के रूप में भी मनाया जाता है। साथ ही, इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा से घर में धन-धान्य, स्वास्थ्य और सौभाग्य की वृद्धि होती है।
धनतेरस 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
| पर्व | तिथि |
|---|---|
| धनतेरस 2025 | 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार) |
| पूजा मुहूर्त | सायंकाल 06:50 बजे से 08:30 बजे तक |
| त्रयोदशी तिथि आरंभ | 20 अक्टूबर, प्रातः 11:30 बजे |
| त्रयोदशी तिथि समाप्त | 21 अक्टूबर, दोपहर 01:15 बजे |
धनतेरस पूजा विधि
- संध्या समय घर की चौखट पर दीपक जलाएं और भगवान कुबेर व मां लक्ष्मी की पूजा करें।
- कुबेर यंत्र या धन्वंतरि यंत्र की स्थापना करें।
- स्वास्थ्य की कामना से तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना शुभ होता है।
- इस दिन नया बर्तन, सोना या चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
- धनतेरस की रात दीपदान से यम देवता की प्रसन्नता भी प्राप्त होती है।
धनतेरस की कथा
कथा के अनुसार, एक बार राजा हिम का पुत्र की मृत्यु उसके विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से होने वाली थी। ज्योतिषियों ने यह भविष्यवाणी की थी। उसकी पत्नी ने उपाय के रूप में अपने पति को सोने-चांदी के गहनों और दीपों से घेर दिया और पूरी रात भजन गाती रही। जब यमराज सर्प रूप में आए, तो उनकी आँखें आभूषणों की चमक से चकाचौंध हो गईं और वे लौट गए। तभी से धनतेरस के दिन दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है।
धनतेरस से दीपावली की शुरुआत
धनतेरस से ही दीपावली उत्सव का आरंभ होता है, जो पाँच दिनों तक चलता है — धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज। प्रत्येक दिन का अपना विशिष्ट महत्व और आध्यात्मिक संदेश होता है।
✨ शुभकामनाएँ: इस धनतेरस पर आपके घर में धन, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की वर्षा हो!
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