शरद पूर्णिमा 2025 — महत्व, व्रत, पूजा और खीर

शरद पूर्णिमा 2025 — महत्व, व्रत, पूजा और खीर
त्यौहार • हिन्दू पंचांग • 6 अक्टूबर 2025

शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है, वर्ष की सबसे उज्ज्वल पूर्णिमा होती है। यह आश्विन मास की पूर्णिमा को आती है और वर्षा ऋतु के अंत व शरद ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। इस रात का विशेष महत्व है क्योंकि माना जाता है कि चन्द्रमा अमृत की वर्षा करता है और देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पौराणिक महत्व

  • लक्ष्मी जी का आगमन: मान्यता है कि इस रात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और जो जागरण करते हैं, उन्हें आशीर्वाद देती हैं।
  • रास लीला: यह रात श्रीकृष्ण और गोपियों की रास लीला से भी जुड़ी है, जिसमें चन्द्रमा की शीतलता दिव्य प्रेम का प्रतीक है।
  • अमृतमयी चन्द्र किरणें: परंपरा है कि इस रात का चन्द्रप्रकाश औषधीय गुणों से युक्त होता है और इसे स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

व्रत एवं पूजा विधि

  • उपवास: श्रद्धालु दिनभर व्रत रखते हैं और रात्रि में जागरण कर भजन-कीर्तन करते हैं।
  • लक्ष्मी पूजन: कमल, दीपक, धूप और नैवेद्य अर्पित कर देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है।
  • चन्द्रमा की रोशनी में खीर: दूध, चावल और चीनी से बनी खीर को खुले आकाश में चन्द्रमा की रोशनी में रखकर अगली सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
  • दान-पुण्य: इस दिन भोजन, वस्त्र और धन का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

शरद पूर्णिमा 2025 — तिथि

तिथि सोमवार, 6 अक्टूबर 2025
पौर्णिमा तिथि प्रारंभ 6 अक्टूबर, प्रातः 02:13 बजे
पौर्णिमा तिथि समाप्त 7 अक्टूबर, 00:29 बजे

खीर की परंपरा (चन्द्रमा के नीचे रखी खीर)

सामग्री (4 व्यक्तियों हेतु):

  • 1 लीटर फुल-क्रीम दूध
  • 1/3 कप बासमती चावल (धोकर भिगोया हुआ)
  • 1/3 कप चीनी (स्वादानुसार)
  • 2 बड़े चम्मच बादाम व पिस्ता कटे हुए
  • 4–6 केसर के रेशे (गर्म दूध में भीगे हुए)
  • 1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर
  • 1 बड़ा चम्मच घी (वैकल्पिक) और कुछ किशमिश

विधि:

  1. दूध को भारी तले वाले बर्तन में उबालें और धीमी आंच पर पकाएँ।
  2. चावल डालकर तब तक पकाएँ जब तक दूध गाढ़ा और चावल नरम न हो जाए।
  3. चीनी, केसर वाला दूध, इलायची, मेवे और किशमिश डालें और 5 मिनट और पकाएँ।
  4. गैस बंद कर खीर को थोड़ी देर ठंडा करें। इसे ढककर रातभर चन्द्रमा की रोशनी में रखें।
  5. अगली सुबह इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

आध्यात्मिक संदेश

शरद पूर्णिमा हमें जागरण, सरलता और कृतज्ञता का संदेश देती है। चन्द्रमा का शीतल प्रकाश मन को शांति प्रदान करता है और यह रात आत्मिक उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।

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